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18 साल पहले कर दिया था अंतिम संस्कार, अब जिंदा लौटा तो खुशी के साथ हुआ गम

नई दिल्ली।
Interesting Story: कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं, जिस पर यकीन करना बेहद मुश्किल होता है। कोरोना संकट ( Coronavirus ) के बीच ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जिस शख्स को मरा समझकर परिवार ने अंतिम संस्कार ( Funeral ) ​कर दिया था, वह 18 साल बाद जिंदा लौटा आया। अपने पिता को दरवाजे पर खड़ा देखकर बेटियां खुशी से झूम उठीं, लेकिन एक दुख भी हुआ जो था पत्नी का। आइए बताते पूरी कहानी…

गोरखपुर के रहने वाले बेचन परिवार के भरण-पोषण के लिए अक्तूबर 2002 में पंजाब गए थे। वहां पूरी मेहनत, मजदूरी की, लेकिन कुछ नहीं मिला। इसके बाद वह हरियाणा और दिल्ली में मजदूरी करते रहें। इसी दौरान वह खुद के लिए ही कमा पाते और फुटपाथ पर ही सो जाते। लॉकडाउन में कामकाज बंद हुआ तो रोजगार का संकट खड़ा हो गया। हालत इतनी खराब हो गई कि खाने तक के पैसे नहीं थे। तब जाकर उसे अपना परिवार याद आया। वह ट्रक की मदद से 5 मई को पादरीबाजार पहुंच गए। मायके जाने की वजह से पत्नी तो घर में नहीं मिली, लेकिन दो बेटियों ने जैसे ही पिता को देखा तो चहक उठीं। दोनों अपने पिता का जोरदार स्वागत किया।

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चार में से दो बेटियों की हुई शादी
बता दें कि बेचन की चार बेटियों में से दो की शादी हो चुकी है। बेटियों ने बताया कि बेचन 2002 में कमाई के सिलसिले में घर से गए थे। लेकिन, उसके बाद वापस नहीं लौटे। मां और पूरे परिवार ने मान लिया कि उनकी मौत हो गई है। 2012 में परिवार ने उनके पुतले का अंतिम संस्कार कर दिया।

पिता को हुआ गलती का अहसास
बेचन ने बताया कि अब उनको अपनी गलती का अहसास हो गया है। कामकाज के चक्कर में गोरखपुर घर नहीं लौट सके। बीच में तबीयत भी खराब हो गई थी। अब जिम्मेदारी का एहसास हुआ तो लौट आए हैं। अब यहीं काम करेंगे। बेटियों की शादी अच्छे घरों में करेंगे। बेटियों को जो प्यार बचपन में नहीं दे सके, वह अब देंगे।

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खुशी के साथ हुआ गम
भले ही बेचन 18 साल बाद लौट आया हो, लेकिन उनको सभी खुशियां नसीब नहीं हुई। नाराज पत्नी चिंता देवी घर छोड़कर चली गईं। उनका कहना है कि जब पति की जरूरत थी, एक-एक दाने और पैसे के मोहताज थे तो वे नहीं आए। अब काम नहीं मिला और खाने के लाले पड़े तो 18 वर्ष बाद लौट आए। ऐसे पति की जरूरत नहीं है, जो अपने घर और परिवार का ध्यान न रख सके।

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